Omega 3 Kya Hai Aur Omega 3 Ke Fayde

शरीर में ओमेगा-3 की कमी होने से कौन-कौन सी समस्याएं शुरू हो सकती है लेकिन फिर भी Omega-3 को अपने खाने में शामिल करने से पहले हमें इसे कब कैसे और कितनी मात्रा में सेवन करना है इस बारे में भी जानकारी होना बहुत जरूरी होता है। तो आज हम बात करने वाले हैं Omega 3 Kya Hai Aur Omega 3 Ke Fayde के बारे में.

खासकर ओमेगा-3 बड़े हुए पिंपल्स जोड़ों का दर्द और दिमागी कमजोरी को दूर करने के साथ-साथ शरीर में बड़े-बड़े इन्फ्लेमेशन एंजायटी डिप्रेशन और आंखों की अच्छी सेहत के लिए बहुत जरुरी होता है। और यहां तक कि यह वजन को संतुलित रखने में भी बहुत मदद करता है।

लेकिन अफसोस की बात यह है कि आजकल खाने पीने की सही जानकारी ना होने की वजह से कई लोगों के शरीर में ओमेगा-3 की कमी पाई जाती है। क्युकी ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि Omega-3 होता क्या है और इसकी कमी को किस तरह से पूरा किया जा सकता है।

ओमेगा 3 के बारे में 6 बाते जाने:

1. ओमेगा-3 क्या होता है और यह हमारे शरीर के लिए इतना जरूरी क्यों है?

2. ओमेगा-3 की कमी को किस-किस खाने की चीजों के जरिए पूरा किया जा सकता है?

3. ओमेगा-3 का कब और किस तरह से इस्तेमाल करना चाहिए?

4. वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन खाने में से किस खाने में सबसे अच्छा omega-3 पाया जाता है?

5. 1 दिन में हमें कम से कम और ज्यादा से ज्यादा कितना ओमेगा-3 लेना चाहिए?

6. क्या ज्यादा ओमेगा-3 लेने से कोई नुकसान भी हो सकता है?

Omega 3 Kya Hai Aur Omega 3 Ke Fayde:

1. ओमेगा-3 क्या होता है और यह हमारे शरीर के लिए इतना जरूरी क्यों है?

शुरू करते हैं नंबर 1 से ओमेगा-3 होता क्या है और यह हमारे शरीर के लिए इतना जरूरी क्यों है दोस्तो जो दिखाते हैं उसमें तीन तरह के माइक्रो न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं प्रोटीन , फैट और कार्बोहाइड्रेट लेकिन इनमें भी जो फैट होता है वह भी 3 तरह के होते हैं saturated फैट , polyunsaturated फैट और monounsaturated फैट और इनमें जो ये polyunsaturated फैट होता है यही शरीर में टूटने के बाद ओमेगा-3 और ओमेगा-6 में बदल जाता है।

वैसे तो ओमेगा-6 और ओमेगा-3 दोनों ही हमारे शरीर और दिमाग को ठीक तरह से काम करने के लिए बहुत जरुरी होता है। लेकिन शरीर में यह दोनों का ही बराबर मात्रा में होना बहुत जरूरी होता है। जैसे कि अगर शरीर में एक ओमेगा-6 हो तो उसके बदले एक ओमेगा-3 भी होना चाहिए। नहीं तो चार ओमेगा-6 के बदले कम से कम एक ओमेगा-3 तो शरीर में होना ही चाहिए। लेकिन समस्या यह है कि आज हमारा खान-पान गलत होने की वजह से शरीर में रक्त की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और लगभग 15 ओमेगा-6 के बदले एक ओमेगा-3 भी मुश्किल से शरीर मै संतुलित हो पाता है।

बड़े का गोश्त , चिकन , दूध , मक्खन , पनीर , अंडा, तेल और सोया प्रोडक्ट में ओमेगा-6 की ज्यादा मात्रा होती है। जबकि अखरोट , अलसी के बीज , चिया सीड ओर कुछ खास तरह कि मछलियों में ओमेगा-3 की ज्यादा मात्रा होती है। तो इसे देखकर तो आप खुद भी समझ सकते हैं कि आप इनमें से कौन सी चीजों का ज्यादा सेवन करते हो।

दोस्तो हम और आप में से ज्यादातर लोग ऐसी चीजों का ज्यादा सेवन करते हैं जिसमें ओमेगा-6 की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। जिसके वजह से समय के साथ साथ जैसे-जैसे ओमेगा-6 की मात्रा शरीर में बढ़ती है तो यह हमारे शरीर में इन्फ्लेमेशन और गर्मी पैदा करने लगता है और तभी से जोड़ों में दर्द , चेहरे पर एक्ने पिंपल्स और ड्राई स्किन जैसी प्रॉब्लम शुरू होने लगती है। इसलिए जरूरी है कि उन्हें ओमेगा-3 वाली चीजों को भी आपने खाने में शामिल किया जाए।

क्योंकि ओमेगा-3 में anti-inflammatory प्रॉपर्टीज पाई जाती है जो कि वह ओमेगा-6 और दूसरी वजह से बढ़े हुए इन्फ्लेमेशन हीट ओर गर्मी को शरीर से कम करने में बहुत मदद करता है।

2. ओमेगा-3 की कमी को किस-किस खाने की चीजों के जरिए पूरा किया जा सकता है?

सामान्य रूप से ओमेगा-3 तीन तरह का होता है।

1. ALA (Alpha Linolenic Acid)

2. EPA (Echosapentaenoic Acid)

3. DHA (Docosahexaenoic Acid)

ALA टाइप का ओमेगा-3 वेजिटेरियन फुड में पाया जाता है जैसे कि अखरोट , अलसी , चिया और सब्जा सीड्स जैसी चीज में पाया जाता है।

EPA ओर DHA टाइप का ओमेगा-3 नोन वेजिटेरियन फुड में पाया जाता है। जैसे कि मेक्रेल , साल्मन , तुना और हेयरिंग जैसी मछलियों में सबसे ज्यादा ओमेगा-3 की मात्रा होती है।

3. ओमेगा-3 का कब और किस तरह से इस्तेमाल करना चाहिए?

लेकिन सवाल ये उठता है कि कैसे इन चीजों का अपने खाने में शामिल किया जाए। अगर आप नॉन वेजिटेरियन है तो हफ्ते में दो से तीन बार रोस्टेड या फिर ग्रे फिश इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन जो लोग वेजिटेरियन है उन्हें अलसी को रोस्ट करके पाउडर बनाकर 1 से 2 छोटा चम्मच किसी भी खाने के साथ मिला कर इस्तेमाल किया जा सकता है।

चिया सिड या सब्जा सीड में से किसी एक को पानी में भिगोकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें और उसके बाद इसे डायरेक्ट इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आप खाने के जरिए ओमेगा-3 नहीं ले पा रहे हैं तो ओमेगा-3 के suppliments भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जो कि fish oil के नाम से मार्केट में या फिर ऑनलाइन भी आसानी से खरीदा जा सकता है।

हालांकि fish oil suppliments को इस्तेमाल करने से पहले बहुत सारी बातों का ख्याल रखना जरूरी होता है। जेसे की फिश ऑयल कब कैसे और कितना इस्तेमाल करना चाहिए।

4. वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन खाने में से किस खाने में सबसे अच्छा omega-3 पाया जाता है?

अब बात करते हैं कि वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन में से किस खाने में ज्यादा बेहतर ओमेगा-3 पाया जाता है। दोस्तों मछली और मछली के तेल में पाया जाने वाला ओमेगा-3 EPA ओर DHA टाइप का होता है। क्योंकि शरीर में जाने के बाद हमारी बॉडी इसे दिल, दिमाग त्वचा, बाल ओर आंखो की अच्छी सेहत के लिए डायरेक्ट यूज करती है।

जबकि प्लांट बेस्ड यानी वेजिटेरियन फूड में ALA टाइप का ओमेगा-3 होता है जो कि हमारे शरीर में जाने के बाद हमारी बॉडी उसे डायरेक्ट यूज नहीं कर पाती बल्कि पहले उसे EPA और DHA में कन्वर्ट करती है और उसके बाद ही वह हमारे शरीर में काम में आता है। लेकिन यहां समस्या यह है कि इस प्रोसेस में 8 से 10% ALA ओमेगा-3 EPA ओर DHA में कनवर्ट हो पाता है। और बाकी का एनर्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए अगर इस हिसाब से देखा जाए तो मछली में पाए जाने वाला ओमेगा-3 ज्यादा बेहतर होता है।

5. 1 दिन में हमें कम से कम और ज्यादा से ज्यादा कितना ओमेगा-3 लेना चाहिए?

दोस्तो रोजाना कितना ओमेगा-3 लेना चाहिए वह किसी भी व्यक्ति की फिजिकल एक्टिविटीज पर निर्भर करता है। एक सामान्य व्यक्ति को EPA और DHA दोनों मिलाकर 1 दिन में कम से कम 700 से 800 mg ओमेगा-3 लेना बहुत जरुरी होता है। अगर आप बहुत ज्यादा हार्ड वर्क या फिर एक्सरसाइज करते हैं तो 1000 mg तक ओमेगा-3 की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। जिसमें लगभग 500 से 600 EPA और 300 से 400 DHA की मात्रा होनी चाहिए।

लेकिन एक बात का ध्यान रखे की आपको EPA ओर DHA पर सिर्फ सप्लीमेंट का इस्तेमाल करते वक्त ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप खाने की चीजों के जरिए ओमेगा-3 की कमी को पूरा करते हैं तो उसमे आपको EPA ओर DHA की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है।

6. क्या ज्यादा ओमेगा-3 लेने से कोई नुकसान भी हो सकता है?

दोस्तों वैसे तो खाने की चीजों के जरिए लिया गया ओमेगा-3 का अक्सर हमारे शरीर में ओवर डोज नहीं होता लेकिन जब सप्लीमेंट की बात आती है तो ज्यादा ओमेगा-3 के इस्तेमाल से नुकसान भी पहुंच सकता है। यूरोपियन फूड सेफ्टी अथॉरिटी के हिसाब से 5000 mg तक ओमेगा-3 सुरक्षित रूप से लिया जा सकता है।

लेकिन मैं यहां यही कहना चाहूंगा कि ज्यादातर लोगों को EPA और DHA मिलाकर 1000 mg से ज्यादा इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर आप 1000 mg से ज्यादा ओमेगा-3 का इस्तेमाल करना चाहते है तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें। क्योंकि शरीर में ओमेगा-3 की मात्रा ज्यादा होने की वजह से लो ब्लड प्रेशर , सांस लेने में दिक्कत और कहीं कट या चोट आने पर खून जल्दी ना रुकने जैसी समस्या शुरू हो सकती हैं।

लेकिन ख्याल रखें कि ऐसा सिर्फ तब होता है जब कोई व्यक्ति जरूरत से बहुत ज्यादा मात्रा में ओमेगा-3 का सेवन करता है। और साथ ही साथ एक बात का ख्याल रखें कि जिन लोगों को पहले से ही लो ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर ही ओमेगा-3 सप्लीमेंट का सेवन करना चाहिए।

तो दोस्तो हम आशा करते है कि आपको ये Omega 3 Kya Hai Aur Omega 3 Ke Fayde के बारे में आज कुछ अलग जान ने को मिला होगा। अगर आपको हैल्थ या फिटनेस से जुड़ी कोई चीज के बारे में जान ना है तो नीचे Comment जरूर करे धन्यवाद !

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Categories: Health

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