high protein foods in hindi

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तो आज हम यह जानेंगे की किस खाने में कितना अच्छा और कितना हाई क्वालिटी प्रोटीन पाया जाता है क्योंकि अगर प्रोटीन की क्वालिटी अच्छी ना हो तो किसी भी खाने में कितना भी ज्यादा प्रोटीन पाए जाने का कोई भी मतलब नहीं बनता है। यह भी समझना जरूरी है कि प्रोटीन सिर्फ muscle build करने के लिए ही नहीं जबकि हार्मोन और एंजाइम के प्रोडक्शन , बाल – हड्डी और त्वचा की अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है और यही वजह है कि जो लोग कोई भी gym exercise नहीं करते उनके शरीर का भी 0.8 gram/kg bodyweight के हिसाब से प्रोटीन लेना बहुत जरुरी होता है।

जिसका मतलब है कि एक 60kg के व्यक्ति को दिन भर में कम से कम 40 से 50 ग्राम प्रोटीन अपने खाने के जरिए पूरा करना बहुत जरूरी होता है।

यह सवाल भी उठता है कि आखिर किसी भी खाने में प्रोटीन की quantity के साथ-साथ उसकी quality का ध्यान रखना क्यों जरूरी होता है। दोस्तो हाई प्रोटीन का फायदा यह है कि दिनभर की प्रोटीन इनटेक के हिसाब से आप उसे रोजाना भी खा सकते हैं जबकि low quality प्रोटीन फूड कभी-कभी या फिर लिमिट में इस्तेमाल करना चाहिए। प्रोटीन की क्वालिटी को 4 शब्दों में समझा जा सकता है।

Conditions Of Quality Protein – गुणवत्ता वाले प्रोटीन की शर्तें

1. प्रोटीन परसेंटेज (Protein Percentage)

पहले प्रोटीन परसेंटेज इसका मतलब किस प्रोटीन फूड में कार्बोहाइड्रेट और फैट की जितनी कम मात्रा होती है प्रोटीन की क्वालिटी उतनी ही अच्छी मानी जाती है और ऐसे प्रोटीन फूड को lean source of protien food भी कहा जाता है।

2. अमीनो एसिड प्रोफाइल (Amino Acid Profile)

प्रोटीन अमीनो एसिड से मिलकर बना होता है और हमारे शरीर को 9 तरीके के essential amino acid की जरूरत पड़ती है जिसे हमें अपने खाने के जरिए पूरा करना होता है। और हाई क्वालिटी प्रोटीन फूड उसे ही कहा जाता है जिसमें पूरे 9 अमीनो एसिड मौजूद हो।

3. पाचनशक्ति (Digestibility)

दोस्तो खाना पेट में जाकर टूटने और पचने की प्रक्रिया को डाइजेस्टिबिलिटी कहा जाता है और इसलिए जो प्रोटीन फूड्स जितनी आसानी से हमारे पेट में टूटता या पचता उसकी क्वालिटी उतनी अच्छी मानी जाती है।

दोस्तो खाना पेट में टूटने और पचने के बाद छोटी आत में पहुंचता है और जब छोटी आत खाने में मौजूद पोषक तत्वों को खींचकर खून मै पहुंचाती है तब इस प्रक्रिया को absorption कहा जाता है। लेकिन जो भी प्रोटीन फूड्स हम खाते है वो पूरा का पूरा हमारे खून में नहीं पहुंचता बल्कि उसमें से कुछ खून में पहुंचकर काम में आता है और कुछ बिना इस्तेमाल हुए ही शरीर से बाहर निकल जाता है या यूं कहें कि यूं ही वेस्ट हो जाता है।

और यह हर खाने में अलग-अलग तरह से होता है खाने में मौजूद प्रोटीन जितना ज्यादा हमारे खून में पहुंचता है उस प्रोटीन फूड की क्वालिटी उतनी ही अच्छी मानी जाती है और इसे प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू या फिर बायोअवेलेबिलिटी भी कहा जाता है।

इन चारों के आधार पर 10 प्रोटीन फूड के बारे में बारी-बारी से जाने की कोशिश करेंगे कि किस खाने में कितना अच्छा प्रोटीन पाया जाता है और साथ में हम अपना सुझाव भी बताएंगे कीे इन खानों को कब और कितनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए।

4. जैविक मूल्य (Biological value)

दोस्तो खाना पेट में टूटने और पचने के बाद छोटी आत में पहुंचता है और जब छोटी आत खाने में मौजूद पोषक तत्वों को खींचकर खून मै पहुंचाती है तब इस प्रक्रिया को absorption कहा जाता है। लेकिन जो भी प्रोटीन फूड्स हम खाते है वो पूरा का पूरा हमारे खून में नहीं पहुंचता बल्कि उसमें से कुछ खून में पहुंचकर काम में आता है और कुछ बिना इस्तेमाल हुए ही शरीर से बाहर निकल जाता है या यूं कहें कि यूं ही वेस्ट हो जाता है।

और यह हर खाने में अलग-अलग तरह से होता है खाने में मौजूद प्रोटीन जितना ज्यादा हमारे खून में पहुंचता है उस प्रोटीन फूड की क्वालिटी उतनी ही अच्छी मानी जाती है और इसे प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू या फिर बायोअवेलेबिलिटी भी कहा जाता है।

इन चारों के आधार पर 10 प्रोटीन फूड के बारे में बारी-बारी से जाने की कोशिश करेंगे कि किस खाने में कितना अच्छा प्रोटीन पाया जाता है और साथ में हम अपना सुझाव भी बताएंगे कीे इन खानों को कब और कितनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए।

High Protein Foods in Hindi

1. फलियां (Legumes)

राजमा चना और हर तरह की दाले लेगुम्स की श्रेणी में आते हैं। 100 ग्राम प्रोटीन में 20 – 25 ग्राम प्रोटीन , थोड़ी मात्रा में फैट ओर लगभग 55 से 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है। इस हिसाब से पता चलता है कि इसमें प्रोटीन की अच्छी खासी मात्रा मौजूद होती है। लेकिन अगर बात कीजिए प्रोटीन की क्वालिटी की क्वालिटी प्रोटीन की 4 शर्तों में से यह सिर्फ एक मै ही पास हो पाता है और तीन में कहीं न कहीं पीछे रह जाता है।

एक शर्तों में इसलिए पास हो जाता है क्योंकि इसमें फैट की quantity कम होने की वजह से यह पचने में ठीक-ठाक होता है और 3 शर्तों में यह इसलिए पीछे रह जाता है कि एक तो इसमें प्रोटीन के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट भी काफी मात्रा में मौजूद होता है और इसलिए इसे लीन प्रोटीन सोर्स ऑफ फूड नहीं कहा जा सकता। दूसरे की इसमें पाए जाने वाले प्रोटीन की biological value भी काफी कम होती है क्योंकि शरीर में जाकर पचने के बाद इसमें में पाया जाने वाला प्रोटीन 50% ही हमारे शरीर में absorb हो पाता है और बाकी का यूं ही वेस्ट हो जाता है।

और तीसरी शर्त है इसलिए पीछे रह जाता है क्योंकि इसमें मेथयुनी नामका एक amino acid दाल , राजमा और चना इन तीनों में ही नहीं पाया जाता है। लेकिन इन चीजों को रोटी या चावल के साथ खाने से पूरे 9 amino acid की पूर्ति हो जाती है। इसलिए हम इन चीजों को 2 शर्तों में पास कर सकते हैं और फिर भी यह दो में कहीं न कहीं पीछे रह जाता है।

इन चीजों का एक बार में 25 ग्राम ओर दिन भर में 50 से 60 ग्राम से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खासकर अगर आप फैट कम करना चाहते हैं क्योंकि इन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है इसे कंप्लीट प्रोटीन बनाने के लिए रोटी या चावल के साथ मिलाकर खाने से कार्बोहाइड्रेट की मात्रा और भी ज्यादा बढ़ जाती है इसलिए इसका लिमिट में ही सेवन करना चाहिए। इन चीजों का एक टाइम सुबह के नाश्ते या फिर दोपहर के खाने में थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं।

2. बीफ (Red meat)

100 ग्राम बिना चर्बी वाले बीफ में 26 ग्राम प्रोटीन और 15 ग्राम फैट होता है। यह भी शुद्ध प्रोटीन नहीं होता और क्वालिटी प्रोटीन की 4 शर्तों में से 1 में ही पास हो पाता है और दो में कहीं न कहीं यह भी पीछे रह जाता है 2 शर्तो में यह पास इसलिए होता है क्योंकि एक तो यह कंप्लीट प्रोटीन होता है जिसमें पूरे 9 अमीनो एसिड मौजूद होते हैं। और दूसरा है कि इसमें पाए जाने वाले प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू अच्छी होती है जो कि शरीर में पचने के बाद लगभग 80% प्रोटीन हमारे शरीर में absorb हो जाता है।

 और जो 2 शर्तों में पीछे रह जाता है उसमें से पहले तो यह है कि इसमें प्रोटीन के साथ साथ फैट भी काफी मात्रा मौजूद होता है। इसलिए इसे लीन प्रोटीन सोर्स ऑफ फूड नहीं कहा जा सकता। और दूसरा यह कि फैट ज्यादा होने की वजह से यह पचने में भी बहुत ही मुश्किल होता है।

बात की जाए इसके इस्तेमाल की तो आपको इसे रेगुलर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होने की वजह से इसके ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने से यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ा सकता है और यही वजह है कि आप इसका कभी-कभी तो इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन कंटिन्यू इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करें।

3. मूंगफली (Peanut)

100 ग्राम मूंगफली में 26 ग्राम प्रोटीन 16 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और लगभग 50 ग्राम फैट मौजूद होता है। इसमें प्रोटीन अच्छी खासी मात्रा में मौजूद तो होता है लेकिन साथ ही इसमें फैट भी बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। हालांकि इसमें पाए जाने वाला फैट ज्यादातर unsaturated होता है इसलिए इसका नियमित मात्रा में सेवन करने से शरीर को फायदा हि होता है और यही वजह है कि मूंगफली को प्रोटीन का नहीं बल्कि हेल्दी फैट का प्रायमरी सोर्स माना जाता है।

 लेकिन अगर बात की जाए प्रोटीन की तो यह क्वालिटी प्रोटीन की चार शर्तों मै कहीं ना कहीं पीछे रह जाता है। क्यूंकि एक तो यह लीन प्रोटीन नहीं होता। इसमें फैट के साथ कार्बोहाइड्रेट भी काफी मात्रा में मौजूद होता है इसकी डाइजेशन और बायोलॉजिकल वैल्यू भी काफी कम होती है साथ ही इसमें पूरे 9 अमीनो एसिड भी नहीं पाए जाते हैं।

 हालांकि मूंगफली को किसी अनाज के साथ खाने से यह कंप्लीट प्रोटीन हो जाता है और यही वजह है कि मूंगफली से ही बनाए गए पीनट बटर को ज्यादातर बॉडीबिल्डर ब्रेड के साथ खाते हैं ताकि उसे कंप्लीट प्रोटीन बनाया जा सके और इसलिए हम इसे एक शर्तों में पास भी कर सकते हैं लेकिन फिर भी क्वालिटी प्रोटीन की 3 शर्तों में यह तब भी कहीं न कहीं पीछे रह जाता है।

हालांकि ऐसे देखा जाए तो मूंगफली एक हेल्थी फ़ूड होता है जिसका थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मूंगफली टॉप एलर्जी फूड की श्रेणी में भी आता है और इसलिए अगर आपको अक्सर फूड एलर्जी हो जाती है तो आपको इसका सोच समझकर ही सेवन करना चाहिए। 1 दिन में मुट्ठी भर मूंगफली या एक से दो चम्मच पीनट बटर का दिन भर में कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

4. पनीर (Paneer)

100 ग्राम पनीर में 18 ग्राम प्रोटीन 1 से 2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और लगभग 21 ग्राम फैट होता है। यह क्वालिटी प्रोटीन की 4 शर्तों में से दो में पास हो जाता है लेकिन दो शर्तों में कहीं न कहीं फिर भी पीछे रह जाता है। दो शर्तों मैं यह इसलिए पास हो जाता है क्योंकि एक तो यह कंप्लीट प्रोटीन होता है क्योंकि इसमें पूरे 9 अमीनो एसिड मौजूद होते है। और दूसरा यह कि पनीर में पाए जाने वाले प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू बहुत ही अच्छी होती है। जिससे कि 80 से 85% प्रोटीन हमारे शरीर में अच्छी तरह absorb हो जाता है और बहुत कम ही वेस्ट हो पाता है।

और 2 शर्तों में यह ईसलिए पीछे रह जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ-साथ फैट भी काफी मात्रा में मौजूद होता है। जिससे कि इसे लिंन प्रोटीन सोर्स ऑफ फूड नहीं कहा जा सकता। और साथ ही इसमें फैट ज्यादा होने की वजह से यह पचने में भी थोड़ा भारी हो जाता है। इसमें खासकर सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होने की वजह से 50 से 100 ग्राम से ज्यादा इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसका हफ्ते में दो से तीन बार नाश्ते या दोपहर के खाने में इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

5. सोया चंक्स (Soya chunks)

100 ग्राम सोया चंक्स में 52 ग्राम प्रोटीन 33 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और फैट ना के बराबर मौजूद होता है। वैसे सोया चंक्स एकमात्र ऐसा पेड़ है जिसमें सबसे ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है। अगर बात की जाए प्रोटीन की क्वालिटी की तो उस बारे में यह क्वालिटी प्रोटीन की 4 शर्तों में से सिर्फ 2 शर्तों में पास होता है और 2 शर्तों में फिर भी कहीं न कहीं पीछे रह जाता है।

दो शर्तों मै इसलिए पास हो जाता है क्योंकि एक तो यह कंप्लीट प्रोटीन सोर्स ऑफ फूड होता है। क्योंकि इसमें पूरे 9 अमीनो एसिड मौजूद होते है। और दूसरा यह कि इस में फैट की मात्रा कम होने की वजह से यह पाचन में भी ठीक-ठाक होता है। और बाकी की 2 शर्तों में इसलिए पीछे रह जाता है क्योंकि एक तो यह लीन सोर्स ऑफ प्रोटीन नहीं होता क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट भी काफी मात्रा में मौजूद होता है। इसलिए इसे लीन सोर्स ऑफ प्रोटीन नहीं कहा जा सकता।

और दूसरा यह कि सोया चंक्स में पाए जाने वाले प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू उतनी अच्छी नहीं होती। जिसकी वजह से यह पेट मे पचने के बाद इसमें मौजूद लगभग 60% प्रोटीन ही शरीर में absorb हो पाता है और बाकी का यूं ही वेस्ट हो जाता है।साथ ही सोया प्रोडक्ट में नेचुरली फाइटोएस्ट्रोजन नाम का हार्मोन होता है। इसलिए इसके ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने से यह शरीर के हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकता है। लेकिन फिर भी दिन भर में 50 ग्राम तक सोया चंक्स consume किया जा सकता है।

6. अंडे (Eggs)

एक एवरेज साइज के अंडे में 6 ग्राम प्रोटीन और 5 ग्राम फैट मौजूद होता है। यह क्वालिटी प्रोटीन के 4 शर्तों में से 2 शर्तों में पास हो जाता है और 2 में यह भी कहीं न कहीं पीछे रह जाता है। यह दो शर्तों में पास इसलिए होता है क्योंकि अंडा एक कंप्लीट प्रोटीन फूड होने के साथ-साथ इसकी बायोलॉजिकल वैल्यू भी बहुत ही हाई होती है। क्योंकि अंदर शरीर में पचने के बाद लगभग पूरा का पूरा 100% शरीर में absorb हो जाता है।

दो मैं यह इसलिए पीछे रह जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ साथ फैट भी काफी मात्रा में मौजूद होता है। जिससे कि इसे लीन सोर्स ऑफ प्रोटीन नहीं कहा जा सकता और साथ ही इसमें फैट ज्यादा होने की वजह से यह पचने में भी थोड़ा भारी हो जाता है।

अगर आप अंडे को पीले वाले हिस्से के साथ खाते हैं तो दिन भर में दो से तीन अंडे से ज्यादा आपको इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। और अगर आप बहुत ही Advanced level पर ट्रेनिंग करते हैं तो एक दो अंडे की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। वैसे तो इसे दिन में कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन सबसे अच्छा यह है कि इसका सुबह नाश्ते में इस्तेमाल किया जाए।

7. गाय का दूध (Cow milk)

आधा लीटर गाय के दूध में 17 ग्राम प्रोटीन 5 ग्राम फैट ओर लगभग 26 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है। क्वालिटी प्रोटीन की 4 शर्तों में से गाय का दूध लगभग 3 शर्तों में पास हो जाता है। तीन शर्तों यह पास इसलिए हो जाता है क्योंकि एक तो यह कंप्लीट प्रोटीन होता है। दूसरा यह की पचने में ना तो बहुत ही ज्यादा मुश्किल और ना ही बहुत ज्यादा आसान होता है। और इसलिए डाइजेस्टिबिलिटी में भी हम इसे मीडियम मान कर चल सकते हैं।

और तीसरा यह के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन की बाय म्यूजिकल वैल्यू भी बहुत ही हाई होती है जिससे कि यह पचने के बाद 90% से भी ज्यादा हमारे शरीर में absorb हो जाता है। और 1 शर्त में यह पीछे इसलिए रह जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट भी काफी मात्रा में मौजूद होता है और इसलिए इस लीन सोर्स ऑफ़ प्रोटीन फूड नहीं कहा जा सकता।

अगर आप Exercise करते हैं तो पाव लीटर से हाफ लीटर तक दूध अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जा सकता है। और बेहतर है कि इसका रात में खाने से एक-दो घंटे बाद और सोने से कम से कम आधे घंटे पहले इस्तेमाल किया जाए।

8. मछली (Fish)

वैसे तो अलग-अलग मछली में प्रोटीन की quantity और quality दोनों ही अलग-अलग होती है। लेकिन जो मछली अंदर से जितनी सफेद होती है उसमें प्रोटीन की उतनी ही ज्यादा मात्रा और उतनी ही अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन मौजूद होता है। जैसे कि Tilapia , Pomfret , Rohu और Katla जैसे कुछ मछलियों के नाम है जिसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन मौजूद होता है।

इस तरह की सौ ग्राम मछली में 17 से 25 ग्राम प्रोटीन होता है जबकि कार्बोहाइड्रेट ओर फैट ना के बराबर मौजूद होता है। बात कीजिए प्रोटीन की क्वालिटी की तो यह क्वालिटी प्रोटीन की लगभग 4 शर्तों में पास हो जाता है और इसलिए सौ ग्राम फिश खाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

9. चिकन ब्रेस्ट (Chicken Breast)

चिकन के दूसरे बॉडी पार्ट में प्रोटीन के साथ साथ साथ फैट भी मौजूद होता है। लेकिन चिकन के सीने वाली हिस्से में हाई क्वालिटी प्रोटीन पाया जाता है इसलिए 100 ग्राम चिकन ब्रेस्ट में 31 ग्राम प्रोटीन , 0 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और ना के बराबर फैट मौजूद होता है।

इसलिए यह क्वालिटी प्रोटीन की लगभग चारो शर्तों में पास हो जाता है। चिकन ब्रेस्ट में हाई क्वालिटी प्रोटीन होने की वजह से ज्यादातर बॉडीबिल्डर भी इसका इस्तेमाल करते ही हैं और आप भी चाहे तो अपनी जरूरत के हिसाब से 50 से 100 ग्राम चिकन ब्रेस्ट अपने खाने में शामिल कर सकते है। और इसका भी दिन में तीनो टाइम खाएं जाने वाले खाने में से कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

10. व्हेय प्रोटीन (Whey Protein)

Whey प्रोटीन भी दूध से ही बनाया जाता है और जो लोग खाने की चीजों के जरिए प्रोटीन के टारगेट को पूरा नहीं कर सकते वह अक्सर ही प्रोटीन सप्लीमेंट का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन एक बात हमेशा ध्यान रखें कि बिना फ्लेवर वाला प्रोटीन ज्यादा शुद्ध और प्योर होता है। क्योंकि इसमें अलग से फ्लेवर , कलर और आर्टिफिशियल जैसी कोई भी चीज नहीं मिलाया जाता है।

लेकिन Unflavored प्रोटीन पाउडर भी दो तरीके के होते हैं Concentrate protien ओर दूसरा है Isolate whey protien कंसंट्रेट व्हे प्रोटीन में 7 से 80% प्रोटीन और बाकी के 20 से 40% में थोड़े फैट और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट मौजूदा होता है। क्वालिटी प्रोटीन की चारो में से तीन शर्तों में तो पास हो जाता है। लेकिन एक शर्त में पीछे इसलिए जाता है क्योंकि कंसंट्रेट व्हे प्रोटीन में कार्बोहाइड्रेट और फैट भी थोड़ी मात्रा में मौजूद होता है।

इसलिए इसे लीन सोर्स ऑफ प्रोटीन नहीं कहा जा सकता फिर भी यह उनके लिए बेहतर होता है जो Weight gain करना चाहते हैं। जबकि आइसोलेट व्हे प्रोटीन हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है और इसलिए weight gain ओर Fat loss दोनो ही विकल्प में इस्तेमाल किया जा सकता है।

Whey प्रोटीन में 85% से 95% प्रोटीन होता है। फैट और कार्बोहाइड्रेट बहुत ही कम मात्रा में मौजूद होता है और इसलिए यह क्वालिटी प्रोटीन की चारों शर्तों में पास हो जाता है।

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11. अंडे की सफेदी (Egg white)

सारा फैट और कोलेस्ट्रॉल अंडे के पीले वाले हिस्से मौजूद होता है और जब पीले वाले को निकाल दिया जाता है तो बाकी शुद्ध और प्योर प्रोटीन ही बचता है लगभग 4 ग्राम प्रोटीन होता है। जबकि फैट ओर कार्बोहाइड्रेट बिल्कुल भी नहीं पाया जाता। और यही वजह है कि यह इतना शुद्ध और प्योर प्रोटीन माना जाता है।

क्वालिटी प्रोटीन की चारों शर्तों में यह पास हो जाता है और इसकी अच्छी बात यह है कि आप बिना किसी मसाले का इस्तेमाल किए भी सिर्फ उबालकर ही इसे खा सकते हैं। और यही वजह है कि सर्दी गर्मी किसी भी मौसम में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही इसे सुबह – दोपहर – शाम – रात एक्सरसाइज से पहले और एक्सरसाइज के बाद कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

और इतना ही नहीं अपने वजन और दिन भर के प्रोटीन इंटेक के हिसाब से आप ईसे रोजाना 5 – 10 – 15 या फिर 20 अंडे की सफेदी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

यहां एक बात का आप ध्यान रखे कि हमने आपको जो बताया है आपको उन सभी खाने का एक ही दिन इस्तेमाल नहीं करना है बल्कि इन सभी खाने में से जो आपको पसंद आता है उसे हफ्ते में बारी-बारी से अपने प्रोटीन इनटेक के हिसाब से खाने में शामिल करने की कोशिश करें।

तो हम आशा करते हैं की आपको Top 14 High Protein Foods in Hindi के बारे में काफी आसानी से पता चल गया होगा।

और पढ़ें: 10 Best बादाम खाने के फायदे – Badam Khane Ke Fayde

Categories: Health

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